शनिवार, 3 जुलाई 2010
जेब के साथ सेहत पर भी असर दिखाने लगी महंगाई
मंहगाई कल तक जेब ढीली कर रहा था। आज सेहत पर भी असर दिखा रहा है। इस तल्ख सच्चाई से हर किसी का वास्ता पड़ रहा है। पिछले 25 जून को पेट्रोलियम पदार्थो की कीमतों में वृद्धि हुई जिसके बाद हर घर की रसोई में गहरी उदासी छा गयी। आटा, चावल, दाल, सब्जी, पापड़, तेल, मशाला,दूध,घी आदि सभी दैनिक उपयोग की सभी सामानों के महंगे होने की आशंका जो बन गयी थी। वह आशंका सच साबित हुई। सभी जरूरी सामानों की कीमतें आज 5 से 10 फीसदी तक बढ़ गयी। आय बढ़ी नहीं और जरूरी सामानों की कीमतें बढ़ गयी तो सेहत पर भी इसका कुप्रभाव पड़ना ही है। कल जक जिस रसोई में औसतन प्रतिदिन दो किलोग्राम सब्जी की खपत थी। बढ़ी हुई कीमतों के साथ आज उसमें कटौती की जाने लगी है। यही हाल अन्य सामग्री का भी है। घरेलू महिला मधु कहती हैं कि इतनी तेजी से मंहगाई बढेगी ऐसा कभी सोचा ही नहीं था। वहीं मीनाक्षी श्रीवास्तव कहती हैं रोज-रोज सामानों की कीमत बढ़ेगी तो भला घर का बजट गड़बड़ायेगा ही। आज घर का पूरा मासिक बजट ही गड़बड़ाता दिख रहा है। आय बढ़ने के साधन नहीं है। शिक्षिका मनोरमा कुमारी का कहना है कि अब उपयोग की जाने वाली सामानों में कटौती करनी पड़ रही है। आसमान छूती मंहगाई से निपटने का यही एक उपाय सूझ रहा है। इन महिलाओं की बातों से साफ है कि महगाई अब जेब ढीली करने तक ही नहीं रह गयी बल्कि लोगों के सेहत को भी प्रभावित करने की स्थिति में है। पेट्रोलियम पदार्थो व रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि का असर शादी-विवाह पर भी पड़ने लगा है। वाहन संचालकों ने किराया में वृद्धि कर दी है। माल ढुलाई बढ़ने से अन्य जरूरी सामान की कीमतें बढ़ गयी है। जिससे वर हो या वधू पक्ष हर किसी का वजट असंतुलित हो गया है। वैसे भी वर्षात के मौसम में सब्जी सहित अन्य सामग्री की कीमतें कम उपज के कारण बढ़ जाया करती है। रही सही कसर पेट्रोलियम पदार्थो की कीमतों में वृद्धि से पूरी हो गयी है।
शुक्रवार, 2 जुलाई 2010
अधर में लटका हुआ है सौ शैया के सदर अस्पताल का निर्माण

सौ शैया वाला सदर अस्पताल लगभग पॉच सालों से अधर में लटका हुआ है। फंड के अभाव में निर्माण कार्य ने अब तक गति नहीं पकड़ी है। जिले के लोग आज भी अनुमण्डलीय अस्पताल पर निर्भर है। 16 जुलाई 2005 को झाारखंड के तत्कालीन महामहिम सैयद सिब्ते रजी ने सौ शैया वाले सदर अस्पताल की अधारशिला रखी थी तब लगभग पॉच करोड़ रूपये अस्पताल निर्माण पर खर्च होने थे और इसे नियत समय में पूरा किया जाना था। निर्माण पुरा करने की अवधि समाप्त हो चुकी है। 10 अप्रैल, 1994 को कोडरमा जिला का सृजन हुआ था। तभी से यह आवश्यकता महसूस की जा रही थी। फिलवक्त स्थिति यह है कि अनुमण्डलीय अस्पताल को हीं उत्क्रमित कर सदर अस्पताल का दर्जा तो दे दिया गया लेकिन सदर अस्पताल के अनुरूप पदों का सृजन नहीं किया गया। वहीं पुराने पद अभी भी बरकरार है। चिकित्सकों, परामेडिकल कर्मियों का घोर अभाव बना हुआ है। सिविल सर्जन डा0 पी0मोहन से जब इस मुत्तलिक बात की गई तो उन्होने कहा कि विभागीय काम हो रहा है और उसमें स्वास्थ्य प्रशासन का कोई हस्तक्षेप नहीं है। निर्माण कार्य एच0सी0एल0 नामक कम्पनी से करवाई जा रही है कम्पनी के लोग भी परेशान है। कई बार फंड के अभाव में उन्हें निर्माण कार्य रोकना पड़ा है। दुसरी ओर स्वास्थ्य चिकित्सा, शिक्षा एवं परिवार कल्याण मद से सी0 व0 डी0 टाईप क्वार्टर, ए0एन0एम0 ट्रेनिंग सेंटर और सिविल सर्जन कार्यालय का भी निर्माण हो रहा है। इन सबों का शिलान्यास विधायक अन्नपूर्णा देवी ने वर्ष 2008-09 में किया था जो आज पुरी होने की स्थिति में है।
गुरुवार, 1 जुलाई 2010
बरसात आते ही बढ़ा रेंगती मौत का खतरा
बरसात का मौसम आते ही रेंगती मौत का खतरा बढ़ गया है। आये दिन सर्पदंश से मौत की खबरें सूनी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में सांप काटने के बाद लोग ओझा-गुणी के चक्कर में पड़कर समय गंवा देते हैं। इसके बजाय यदि वे समय पर अस्पताल आए तो मौत से बचाया जा सकता है। बरसात के मौसम में कोबरा, करैत व अन्य जहरीले सांप भी अपने ठिकाने बदलने के लिए भटकते हैं। ऐसे में कोई उसके राह में रूकावट बने तो उसकी खैर नहीं। सांप काटे तो सीधे मरीज को अस्पताल जाना चाहिए, तभी समुचित उपचार संभव हो सकता है। कोडरमा सदर अस्पताल में जहरीले सांपों की दवा भी उपलब्ध है। सिविल सर्जन पी मोहन का कहना है कि यदि हाथ अथवा पैर में सांप काटे तो तत्काल उस अंग को थोड़ी दूर पर धीरे से बांधना चाहिए, ताकि धीरे-धीरे खून का बहाव होता रहे। इसके बाद मरीज को तुरंत अस्पताल लाना चाहिए। सदर अस्पताल में सांप काटने का एंटी स्नेक सीरम दो तरह का उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि यदि सांप की पहचान हो जाए तो बेहतर है अन्यथा चिकित्सकों को काफी सावधानी पूर्वक मरीज में होने वाले लक्षण को भांप कर ही दवा देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लक्षण पर गौर करके उपचार हो तो रोगी को आसानी से बचाया जा सकता है। इसमें थोड़ा समय जरूर लगता है। उन्होंने कहा कि सांप का इंजेक्शन भी जहरीला ही होता है, ऐसे में जांच कर ही दवा देना चाहिए। प्राइवेट क्लिनिकों में भी इसका इलाज हो सकता है। जहरीला सांप काटने के बाद रोगी के आंख की पपनी, धड़कन, शरीर का तापमान आदि पर गौर करना महत्वपूर्ण होता है। जिसके आधार पर इलाज संभव हो पाता है।
शनिवार, 20 फ़रवरी 2010
पानी बना रहा बच्चों को विकलांग

कोडरमा के कई गांवों में दर्जनों लोग हुए विकलांग
झारखंड बिहार की सीमा पर बसे कोडरमा जिले के कुछ गांव ऐसे हैं जहां पानी के इस्तेमाल से बच्चे और बडे विकलांग हो रहे हैं। ये बदनसीब ऐसे कि पानी का घूंट लेते वक्त उनके हाथ-पैर कांपते हैं। इन गांवों में बडे भी खुद कब की लाठी थामे हैं, अब बच्चों को बैसाखियों के सहारे जिंदगी ढोते देख रहे हैं। कोडरमा घाटी में बसे गाव मेघातरी, उससे सटे विष्नीटिकर और करहरिया को विकास का मुखौटा तो मिल गया, हाल ही में बिजली भी पहुंची लेकिन सालों पुराने फ्लोराइड की अधिकता का अभिशाप आज यहां जनजीवन पर कुंडली मारे बैठा है। आलम यह है कि गाव के दर्जनों बच्चे और बुजुर्ग विकलाग हो चुके हैं। कुछ पढ़े-लिखे ग्रामीणों ने यह दर्द प्रशासन तक पहुंचाया पर कोई परिणाम नहीं निकला। बैसाखी पर लटके युवाओं और बच्चों को देखकर इनका दिल रोता है। गाव छोड़कर शहर में बसना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक मजबूरियों की बेड़िया कहीं ज्यादा मजबूत हैं। जिला मुख्यालय कोडरमा से सिर्फ 18 किलोमीटर दूर मेघातरी पंचायत की आबादी करीब ढाई हजार है। पहले जब यहां काफा मात्रा में माइका निकलता था तब क्षयरोग से युवावस्था में ही लोगों की मौत हो जाने से बडी संख्या में महिलाओं के विधवा हो गयी थीं और इसे विधवाओं की बस्ती कहा जाने लगा। अब यहां जल में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा होने के कारण एक के बाद एक ग्रामीण विकलाग होते जा रहे हैं और तीन साल के बच्चों तक के शरीर विकृत हो चुके हैं। पानी की सुविधा के लिए गाव में कई चापानल भी लगाये गये पर स्थिति नहीं सुधरी और नये नये मामले सामने आते रहे हैं। गाव में रहने वाले 28 साल के कुन्दन कहते हैं दो साल पहले अचानक स्थिति बिगडी जिसके बाद कई जगहों पर इलाज करवाया पर ठीक नहीं हो सका। मेघातरी में सत्येन्द्र सागर सिंह का 11 वर्षीय पुत्र रीतिक, जगदीष प्रसाद का 4 वर्षीय पुत्र राजू, सरयू साव का 6 वर्षीय पुत्र दिवाकर पैरों से विकलांग हो चुके हैं। इसी प्रकार करहरिया में जितेन्द्र (13 वर्ष, पिता लक्ष्मण सिंह), संगीता कुमारी (6 वर्ष, पिता विजय सिंह), झलवा (13 वर्ष, पिता स्व. सरयू सिंह), बसंती (12 वर्ष, पिता जेठू सिंह), बिरेन्द्र सिंह (13 वर्ष, पिता कैलू सिंह) भी विकलांगता के अभिषाप से ग्रस्त हैं। बिरेन्द्र की पत्नी सूनीता और लक्ष्मण सिंह की पत्नी लीलवा देवी भी विकलांग हो चुकी है। 13 साल के जितेन्द्र का पैर भी मुड़ चुका है और आज वह लाठी के सहारे चलता है। सामाजिक कार्यकर्ता और मेघातरी निवासी सत्येन्द्र सिंह सागर ने पानी के कारण बच्चों के विकलांग होने की जानकारी सरकारी स्तर पर विभाग को और उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी दी पर अब तक कोई कार्यवाई नहीं हुई। ऐसे में यहां के बच्चे पानी के कारण विकलांग होने और लाठी का सहारा लेने को अभिषप्त हैं। इस बीमारी के संबंध में कोडरमा के एसीएमओ डा. एमए अषरफी से बात करने पर उन्होंने कहा कि यह विटामिन डी या हार्मोन की कमी के कारण भी हो सकता है। पानी में फ्लोराइड की ज्यादा मात्रा भी कारण हो सकता है। उन्होंने बताया कि इसकी जांच के लिये एक टीम गठित की जायेगी जो जल्द ही जांच कर रिपोर्ट देगी और तब इनका इलाज करवाया जा सकेगा।
बुधवार, 23 दिसंबर 2009
राजद ने झाविमो को मात दी

कोडरमा विधानसभा सीट पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) एक बार फिर विजयी रहा है। राजद प्रत्याशी अन्नपूर्णा देवी ने झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) के रमेश सिंह को 17 हजार से भी अधिक मतों से पराजित कर दिया। कोडरमा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रत्याशी विजय कुमार साव तीसरे नम्बर पर रहे और झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के महेश राय चौथे तथा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रत्याशी साजिद हुसैन पांचवें स्थान पर रहे। कोडरमा में कुल 16 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे और यहां कुल 1,47,339 मत पड़े थे। इसमें राजद को 46,922, झाविमो को 29,639 और भाजपा को 27,654 मत मिले। वहीं झामुमो को 14,393 और बसपा को 13,377 मत मिले।
यहां मतगणना की शुरुआत सुबह 8 बजे हुई और पहले दो चक्र में राजद की अन्नपूर्णा देवी झाविमो के रमेश सिंह से आगे थीं। तीसरे चक्र में श्री सिंह ने बढ़त बना ली, पर उसके बाद पांचवें चक्र से अन्नपूर्णा देवी ने लगातार बढ़त बनाये रखी। दिन के लगभग दो बजे मतगणना समाप्ति के बाद निर्वाची पदाधिकारी शिशिर कुमार सिन्हा ने राजद की अन्नपूर्णा देवी के निर्वाचित होने की घोषणा की। उस समय वहां चुनाव प्रेक्षक जयराज कुमार, जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त डा. राजीव अरुण एक्का के अलावा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
विभिन्न प्रत्याशियों को मिले मत : अन्नपूर्णा देवी (राजद)- 46922, रमेश सिंह (झाविमो)- 29639, विजयकुमार साव (भाजपा)- 27654, महेश राय (झामुमो)- 14393, साजिद हुसैन (बसपा)- 13377, सिकंदर धोबी (निर्दलीय)- 3673, शिवनन्दन कुमार शर्मा (निर्दलीय)- 2062, परमेश्वर महतो (भाकपा माले)- 1588, बीरेन्द्र यादव (निर्दलीय)- 1444, राजकिशोर प्र. मोदी (निर्दलीय)- 1346, कृष्णा सिंह (निर्दलीय)- 1268, महादेव साव (निर्दलीय)- 1116, भिखदेव राम (निर्दलीय)- 777, अंजनी कुमार सिंह (निर्दलीय)- 768, श्यामदेव यादव (सपा)- 760, शोभा कुमारी (झापा)- 551.
सोमवार, 16 नवंबर 2009
सामाजिक बदलाव के साथ मीडिया का चेहरा भी बदला

आज सामाजिक सरोकार रखने वाले सभी लोगों की सुबह अखबारों से होती है और यह हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। पर यह भी सच है कि जैसे जैसे समाज के हर तबके में बदलाव आया है, भारतीय मीडिया का चेहरा भी बदला है। कोडरमा स्थित झारनेट कक्ष में सोमवार को प्रेस दिवस पर भारतीय मीडिया का बदलता चेहरा विषय पर आयोजित परिचर्चा में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित उप विकास आयुक्त हसीब अख्तर ने उक्त बातें कहीं। उन्होंने कहा कि पहले खबरों की विश्वसनीयता ज्यादा रहती थी, पर अब इसमें कमी देखी जा रही है, हांलाकि मीडिया का प्रभाव पहले से अधिक बढ़ा है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी सीडी शर्मा ने आगत अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि आज भी मीडिया सामाजिक दायित्व के तहत अपने कर्तब्य का निर्वहन कर रही है। इसमें अपने विचार रखते हुए रांची एक्सप्रेस के संजीव समीर ने कहा कि वर्ष 1923 में जब सूर्यकांत त्रिपाठी निराला और शिवपूजन सहाय ने मतवाला अखबार का प्रकाशन शुरू किया था, तब भी विज्ञापन की अपील की गयी थी, क्योंकि बाजार तब भी हावी था। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में पत्रकारिता का उल्लेखनीय योगदान है तो वहीं अब पत्रकारिता का विद्रूप चेहरा भी देखने को मिलता है। इसके बावजूद पत्रकार आज भी समाज में आईना दिखाने का ही काम करते हैं। प्रभात खबर के जगदीश सलूजा ने कहा कि पत्रकारिता में व्यावसायिकता हावी हुई है, पर इसके बाद भी भारतीय मीडिया समाज के प्रति उत्तरदायी है। वहीं यूएनआई के विनोद विश्वकर्मा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आज पत्रकारिता में बाजारवाद हावी है, अखबारों में विज्ञापन जरूरी है तो वहीं पूंजीपतियों का मीडिया बाजार पर कब्जा है। समाज में इसकी विश्वसनीयता पर प्रशनचिन्ह लगता है पर हकीकत है कि पत्रकार अभी भी समाज के प्रति उत्तरदायी होकर ही काम करते हैं। इस परिचर्चा के दौरान अपर समाहर्ता उदय प्रताप सिंह, जिला कल्याण पदाधिकारी तापेश्वर राम, भू अर्जन पदा. एमडी मिंज, उप निर्वाचन पदाधिकारी गीता चौबे, योजना पदाधिकारी रेखा रानी समेत अन्य अधिकारी, जनसम्पर्क विभाग के कर्मी और पत्रकारों में मकसूद आलम, आफताब आलम, आत्माराम, मुकेश सिन्हा, समरेन्द्र नारायण समेत अन्य उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरूआत उप विकास आयुक्त हसीब अख्तर, अपर समाहर्ता उदय प्रताप सिंह, जनसम्पर्क अधिकारी सीडी शर्मा और उप निर्वाचन अधिकारी गीता चौबे ने दीप प्रज्वलित करके की।
मंगलवार, 6 अक्टूबर 2009
कोडरमा संसदीय क्षेत्र में होगी राजनीतिक उथल-पुथल
विधानसभा चुनाव के पूर्व कोडरमा संसदीय क्षेत्र की राजनीति में उलटफेर की पृष्ठभूमि तैयार हो चुकी है। अक्तूबर महीने में ही कई प्रमुख राजनीतिक दलों के नेता इधर उधर होंगे और इससे राजनीति का नया समीकरण भी तैयार होगा। यहां के पूर्व सांसद स्व. रीतलाल प्रसाद वर्मा के पुत्र प्रणव वर्मा अपने समर्थकों के साथ राजद छोड़कर कोडरमा सांसद बाबूलाल मरांडी की पार्टी में शामिल होंगे। इसके लिये 13 अक्तूबर की तिथि भी निर्धारित की गयी है और कार्यक्रम भी श्री वर्मा के पैतृक गांव भंडारो में होना तय हुआ है। ज्ञात हो कि प्रणव वर्मा गत दो लोकसभा चुनाव बाबूलाल मरांडी के खिलाफ लड़े थे, वहीं 2004 में उनकी मां श्रीमती चम्पा वर्मा ने भी बाबूलाल मरांडी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। वर्ष 2006 के उप चुनाव में प्रणव वर्मा भाजपा के टिकट पर और 2009 में राजद के टिकट पर चुनाव मैदान में थे, दोनों ही चुनावों में प्रणव वर्मा को अच्छे वोट हासिल हुए थे। माना जा रहा है कि प्रणव वर्मा और उनके समर्थकों के झाविमो में शामिल होने से पार्टी की स्थिति मजबूत होगी। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि आगामी विधानसभा चुनाव बाबूलाल मरांडी अपने गृह क्षेत्र राजधनवार या फिर कोडरमा से लड़ेंगे। इस चुनाव में वह जीते तो लोकसभा से इस्तीफा देकर प्रणव वर्मा को कोडरमा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ायेंगे। इस तरह प्रणव वर्मा बाबूलाल के सहारे लोकसभा का सफर तय करने का प्रयास करेंगे, जबकि प्रणव वर्मा के सहयोग से बाबूलाल कोडरमा संसदीय क्षेत्र के सभी छह विधानसभा क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करेंगे। यह भी उल्लेखनीय हो कि कोडरमा संसदीय क्षेत्र में प्रणव वर्मा के स्वजातीय लोगों की खासी आबादी है, जिसपर वर्मा परिवार का प्रभाव भी अच्छा है। इसी समीकरण के आधार पर दोनों पक्षों में सहमति हुई है। जिसे 13 अक्तूबर को अमली जामा पहनाया जायेगा। इधर कोडरमा विधानसभा क्षेत्र में भी राजनीतिक खींचतान जारी है और इसी महीने कुछ नया गुल खिलने की पूरी संभावना है। झारखंड विकास युवा मोर्चा के केन्द्रीय महामंत्री खालिद खलील बरकट्ठा से चुनाव लड़ने के मूड में हैं और जैसी कि संभावना है झाविमो में टिकट नहीं मिलने की स्थिति में वह कांग्रेस या राजद का दामन थाम सकते हैं। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो कोडरमा की राजद विधायक अन्नपूर्णा देवी के साथ इस संबंध में उनकी और झाविमो नेता सह सांसद प्रतिनिधि अनवारूल हक की बातचीत भी हो चुकी है। इसी प्रकार पिछले चुनाव में निर्दलीय लड़कर दूसरे स्थान पर रहे साजिद हुसैन लल्लू के भाजपा में जाने की कई महीनों से चर्चा है, पर इसपर अभी तक जिला संगठन का विरोध कायम है। ऐसे में वह भी कुछ नया निर्णय ले सकते है,ं हांलाकि भाजपा में उनका जाना तय बताया जाता है। कांग्रेस पार्टी को भी टिकट के सवाल पर झटका मिल सकता है तो वहीं दूसरी पार्टी से कुछ और लोगों के भाजपा, कांग्रेस या राजद में जाने की चर्चा है।
बुधवार, 23 सितंबर 2009
झुमरीतिलैया में नकली घी फैक्टरी का भंडाफोड़

झुमरीतिलैया स्थित वीर कुंवर सिंह पथ के निकट नकली घी फैक्टरी का उद्भेदन किया गया है। इस मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। गुप्त सूचना के आधार पर की गयी इस छापेमारी का नेतृत्व कोडरमा पुलिस अधीक्षक क्रांति कुमार गडदेशी स्वयं कर रहे थे। यहां गणेश घी के नाम पर डब्बों की पैकिंग की जा रही थी। फैक्टरी से पुलिस ने गणेश मार्का डब्बों में बंद एक टन नकली घी, बगैर पैकिंग के खुले डिब्बों में आधा टन घी और आधा टन कच्चा घी भी बरामद किया है। वहीं फैक्टरी से घी ढोने वाला वैन (जेएच02एम 8625) को भी बरामद किया गया है। इसके अलावा पैकिंग मशीन और खाली डिब्बे भी जब्त किये गये है। फैक्टरी में 50 ग्राम, 100 ग्राम, 500 ग्राम के डिब्बों में नकली गणेश घी की पैकिंग कर जिलों में आपूर्ति की जा रही थी। फैक्टरी में दो लोगों को पकडा गया जिनमें मालिक मंटू कुमार सिंदुरिया और उसके चचेरा भाई सह कर्मी पिंटू कुमार सिंदुरिया शामिल है। वहीं छापेमारी में तिलैया थाना प्रभारीएमएन तिवारी, एएसआई अशोक कुमार सिंह, साधु चरण विरूली समेत अन्य पुलिस बल के जवान शामिल थे। मिली जानकारी के अनुसार पुलिस को नकली घी बनाने की सूचना मिली थी और आज सुबह छापेमारी के लिये पुलिस टीम का गठन किया गया था। वहां पाम आयल और डालडा आईआईएम (घी के समान सुगंध देने के लिये) को मिलाकर नकली घी तैयार किया जा रहा था। यह भी बताया गया कि खाली डिब्बों को कोलकाता से मंगाया गया था और उसमें नकली घी पैक कर असली घी कहकर बिक्री जा रही थी। नकली घी के कारोबार और फैक्टरी के उद्भेदन में यह बात सामने आयी कि यहां तैयार नकली घी कोडरमा, डोमचांच और झुमरीतिलैया के स्थानीय बाजार के अलावा देवघर, बरही और गिरिडीह में भी खपाया जाता था। नकली घी की पैकिंग बिल्कुल असली गणेश घी की तरह की जाती थी, वहीं दुकानदारों को ज्यादा लाभ मिलने के कारण वे इसे ही बेचते थे। इन दिनो यह भीं देखने को मिल रहा था कि गणेश मार्का घी ग्रामीण इलाकों में ही ज्यादा खपाने की कोशिश हो रही थी।
सोमवार, 13 जुलाई 2009
कोडरमा में लोजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष समेत छह गिरफ्तार

कोडरमा थाना पुलिस ने लोकजनशक्ति पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। इन सबों को आज कोडरमा जेल भेज दिया गया। गिरफ्तार होने वालों में लोजपा का जिलाध्यक्ष और झुमरीतिलैया नगर अध्यक्ष भी शामिल है। कोडरमा थाना प्रभारी सीपी यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि रात में इन सबों के द्वारा कोडरमा घाटी स्थित दिबौर स्टैंड पर स्टैंड ठीकेदार और वीडियोग्राफी कर रहे लोगों को धमकी देते हुए उनसे पांच सौ रूपये छीन लिये। इस संबंध में कोडरमा एसपी क्रांति कुमार गडदेशी के निर्देष पर चेकनाका पर इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले में अनिल कुमार राजवंशी के द्वारा प्राथमिकी भी दर्ज करायी गयी है। इसके साथ ही उक्त सभी लोग कोडरमा कोर्ट परिसर में हुई फायरिंग की घटना में भी शामिल थे। गिरफ्तार होने वालों में लोजपा प्रदेश उपाध्यक्ष महेश राय, जिलाध्यक्ष सच्चिदानन्द गांधी, मनोज सिंह, रंजीत कुमार, धीरज सिंह और लोजपा का नगर अध्यक्ष विजय शुक्ला शामिल है। इधर महेश राय ने उसपर लगे ओरोपों को साजिश करार देते हुए कहा कि वह रात में पटना से रांची राज्यपाल महोदय से मिलने जा रहा था और इसी दौरान उसकी गिरफ्तारी की गयी। इधर एक अन्य मामले में तिलैया पुलिस ने मुख्य मार्ग पर अवैध रूप से वाहनों से वसूली करने के आरोप में 14 लोगों को पकडा जिन्हे बाद में चेतावनी देकर और निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
..और ग्रामीणों ने अपने बूते किया सड़क निर्माण
प्रशासनिक पदाधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों का आश्वासन पूरा नहीं होते देख ग्रामीणों ने अंतत: अपने ही बलबूते सड़क निर्माण करने का बीड़ा उठाकर समाज को एक अच्छा संदेश देने का काम किया है। यह अनूठी व अनुकरणीय पहल जमुआ प्रखंड अंतर्गत डेगारडीह मौजा के लोरियामों टोले के महिला पुरुषों ने की है। करिहारी पंचायत के लगभग 250 आबादी वाला लोरियामों गांव विकास से अछूता है। मुख्य मार्ग से लगभग डेढ़ किमी दूर अवस्थित इस गांव को जोड़ने वाली पगडंडी की स्थिति भयावह है। ग्रामीण बताते हैं कि नरेगा के तहत एक भी विकास कार्य इस गांव में नहीं हुआ है। विधायक से लेकर सांसद ने यहां के ग्रामीणों को विकास के सपने दिखाए। लेकिन हालत जस की तस है। एक मात्र रास्ता से होकर खासकर बरसात के दिनों में गुजरना यहां के ग्रामीणों के लिये काफी मुश्किल था। ग्रामीणों ने बैठक कर सड़क निर्माण खुद करने का फैसला लिया। सोमवार को दर्जनों की संख्या में महिला, पुरुष एवं बच्चों ने हाथ में कुदाल, टोकरी थामा और सड़क निर्माण में जुट गये। फिर क्या था युद्धस्तर पर कार्य चला। लोरियामों गांव के लोगों की इस अनूठी पहल की ग्रामीणों को सराहना की। साथ ही प्रशासन के उस दावे को भी कठघरे में खड़ा करने का काम किया जो मजदूरों का रोना रोकर नरेगा को इमानदारी से गति देने की इच्छा नहीं रखते। लोरियामों गांव के लोगों का यह सराहनीय कार्य उन जनप्रतिनिधियों के लिए भी करारा जवाब है।
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